ठाकुरदास घड़ी(thakurdas gadi)part4

अन में बाबू दुगत्रिसाद जी पे नगर कोतवाल ते कहकर बततात् गाटी जढवाई छर अपन जनाटार ।तह मतट कु

साग कर दिन । सीताराम चौवे माह से मैनपुरी तक, शाम गये थे।
*एक बारगाधीराम के तले प्राख्यान देते ४ए कि लोग जीत हैं कि [भिती 'श' गर(f,
वे आग / का उतार्यो शेर के लिए कोई अन्य आधार योजना पड़ा और उस के faiअय। 11
तो दी है, परन्तु लीग इस का अर्थ नहीं जानते और भूल न लगने वा अनं यत्र या अशा ॥
सब तो नाशवान् ४, सब में से शेष परमेश्वर है और पृषिवी उस के आधार पर रिणित है। *
व्यक्षना द्वारा शिक्षा-"एक दिन हम को शिक्षा के रूप में रनाकर कहा कि ऐरा कौन पूर्ण होगा जवाब
दूसरे के खेत में जाकर यावे र यदि कोई ऐसा को तो उस हा फस से मिल सकता है? नीवार था 3. zिfra
हम से और कोई उत्तर न बन पड़ा और एक बार हमसे कहा कि तुम इसको छोड़ दो और तपन दा। मन मानी
देता परन्तु अवश्य छोड़ दूगा। अब परमेश्वर की कृपा और उनके उपदेश रे हमने इस शरन को पूर्णतया cिण।।

ला० नारायणदास साहय मुख्तार, मंत्री आर्य समाज फर्सखायाद ने वर्णन किया था पर केवराट
कुछ बदमाशों की लड़ाई हुई जिस पर न्यायालय से दो बदमाशों को तीन-तीन मार वी वैद हुई घी। कुछदिनपश्दात्र
स्वामी जी फरीदाबाद आये । इस मुकदमे का निर्णय मिटर आवाज शव ने न्यायालय में हुआ था, वामीजी के
परिचित थे। स्वामी जी से भेंट के समय गैजिर्ट्रेट साहब ने स्वागी जी से मुकहमे की खच्चा की रवामी जी ने
कि और तो ठीक था परन्तु घटनास्थल बोई दूसरा शा, वह रथान नहीं था, केवल इतना झूठ था ।वामी जी ने विना रो-रोक
वास्तविकता बता दी, किसी का कुछ पक्ष न किया ।

कैण फतहगढ़ में व्याख्या के समय हस्टन साहब जाइण्ट मैजिस्ट्रेट ने योग के विषय में पूछा था । र्थामी जी
ने योग की व्याख्या की और कहा कि यदि आप लोग योग करना चाहे तो नहीं कर सकते क्योंकि मदिरा का सेवन
करते हैं। यदि योग करना चाहो तो रोटी और मूंग की दाल खानी घाहिये,तभी कर सकते हो, अन्यथा नहीं।

मैनपुरी का वृत्तान्त-चाबी हरदयाल जी ने वर्णन किया मिर्जा अहमद अली बेग,सदरुलसदूर, और मोहनलाल
मुन्सरिम आदि बहुत से लोग बाग में मिलने गये थे और प्रतिदिन जाया करते थे। ध्याख्यान उन के अकटगंज में सराय के
भीतर हुए । कुल तीन व्याख्यान हुए। शामियाना लगाकर निश्चित रूप से प्रबन्ध किया गया था और एक दिन परमेश्वर
की सिद्धि में व्याख्यान दिया। दूसरे दिन वेद की उत्पत्ति और धर्मोपदेश, तीसरे दिन वेद के प्रतिपादन और सब मतं के
खंडन पर व्याख्यान दिया । एक अंग्रेज डॉक्टर ने नास्तिक का प्रश्न किया। स्वामी जी ने उस का उत्तर देकर कहा था
कि वे परले सिरे के नास्तिक है, जो मैटर (प्रकृति) आदि को भी नहीं मानते । कलैक्टर साहब, इलियट साहव जज और
डाक्टर साहब प्रतिदिन व्याख्यान में आया करते थे। व्याख्यानों की समाप्ति पर मिर्जा अहमद अली बेग ने बहुत धन्यवाद
दिया था। वह जो कहते हैं कि दूर देश जैसे चीन आदि के लोग यहां पद्ने आया करते थे तो निस्सन्देह जब महाराज के
समान महात्मा लोग होंगे तब ही अन्य देशों के लोग आते होंगे।

स्वामी जी कुल पांच दिन रहे । हमने 'इदं विष्णु विचक्रमे त्रेधा निदथे पदम वाले मन्त्र का अर्थ पूछा था ।
स्वामी जी ने कहा कि 'तीन पदो से अभिप्राय, अंधकार, पोल और 'प्रकाश' से है। चौबे अमीलाल प्लीडर और किशनगोपाल
वकील भी जाया करते थे । किसी पादरी या पंडित से यहां शास्त्रार्थ नहीं हुआ। हम ने 'पवित्र भूमि' के विषय में पूछा था ।।
कहा कि हिमालय पर भी कोई पाप करेगा तो भी फल भोगेगा

Thomas

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