फल असीम(FL Ashim)part3

बीच में यह दिनों तक दौरा सपर्द करना तो दण्ड से भी अधिक भारी है। फिर उग को स्वर्ग या नाव
से मिल सकता है? कोई भी नहीं। और जब आप सर्वज्ञ नहीं तो, व्यों दावा करते हैं कि पुनर्जन्म नहीं। इस से
एक जन्म सिद्ध नहीं होता है और पुनर्जन्म सिद्ध हो गया।
विषय-"क्या ईश्वर देह धारण करता है?

(ता० २६ अगस्त, सन् १८७९)
पादरी स्काट साहत-आज का प्रश्न यह है कि परमेश्वर देह धारण करता है या नही अर्थात वह राकार तो सकता
है या नहीं ? उचित तो यह है कि इस विषय में अत्यन्त दैन्यभावना से बातचीत की जाये । जब महान ईश्वर के सम्बन्ध में
वार्तालाप हो तो मनुष्य को चाहिये कि अत्यन्त सोच-विचार और गम्भीरतापूर्वक बोले । इसमें घमंड और गर्व से अवगत
नहीं है कि मानो हम ईश्वर के विषय में सब कछ जानते हैं। किसी कवि ने कहा है

अर्श' से ले फर्श तक जिसका कि ये सामान है। हम्द उसकी गर लिखा चाहूं तो क्या इमकान है।
जब पैगम्बर ने कहा हां मैंने पहचाना नहीं । फिर कोई दावा करे इसका बड़ा नादान" है॥'

सोचिये तो सही कि ईश्वर की शाश्वतता के विषय में हम क्या जानते हैं? सो इसी प्रकार हम उस सर्वशक्तिमान् ।
के विषय में क्या जानते हैं? वह सर्वव्यापक अर्थात् प्रत्येक स्थान पर है, इसके विषय में हम क्या जानते हैं ? हां, इन शब्दों
के कुछ-कुछ अर्थ हम जानते हैं परन्तु दृढ़ता से यह कथन कि हम ईश्वर के विषय में सब कछ जानते हैं, मूर्ख ही करते हैं।
आज की बातचीत में दो प्रश्न ये हैं-क्या ईश्वर देह धारण कर सकता है? दूसरे यह कि ऐसा कभी हुआ है कि नहीं?
विशेष रूप से पहले प्रश्न के बारे में ही इस समय बातचीत है। पहले प्रश्न का भाव यह है कि क्या यह सम्भव है कि ईश्वर
अपने आप को शरीर में प्रकट करे ? विचार कीजिए, यह अभिप्राय नहीं है कि ईश्वर शरीर बन जाये । हमारा पहला दावा
यह है कि उसके लिए देह धारण करने की सम्भावना है। मनुष्य की आत्मा और ईश्वर की आत्मा बहुत-सी बातों में समान
है, अपितु यह कहना उचित है कि दोनों एक ही प्रकार की आत्माएं हैं क्योंकि ईश्वर की वाणी में लिखा है कि खुदा ने मनुष्य
को अपनी सूरत पर बनाया। परन्तु यह नहीं कि शारीरिक आकृति में (समान बनाया) परन्तु आध्यात्मिक रूप में (समान
बनाया) अर्थात् बहुत-सी विशेषताएं जो ईश्वर में हैं, वही मनुष्य में भी हैं—उदाहरणतया दया, न्याय और नाना प्रकार
की धार्मिक विशेषताएं। इसी कारण मनुष्य ईश्वर के साथ मेल कर सकता है। ऐसी अवस्था में हम जो शरीरधारी हैं।
क्यों अहंकार करें कि ईश्वर देहधारी न हो । यदि उसकी इच्छा हो कि देह में प्रकट हो तो ऐसा करना उसकी शक्ति से क्या
बाहर है ?

हस्ताक्षर–पादरी स्काट साहब
स्वामी दयानन्द सरस्वती जी जो पादरी साहब ने कहा कि उसकी हम परीक्षा नहीं कर सकते तो इस पर मेरा
प्रश्न यह है कि (परीक्षा) बिलकुल नहीं कर सकते या कुछ-कछ कर सकते हैं? वैसे सर्वव्यापक के विषय में कुछ जानते हैं
नहीं ? यदि कुछ जानते हैं तो कितना ? यदि किसी का कहना हो कि मैं ईश्वर को जानता हो तो वह मर्ख है। और यदि
हरी साहब का यही कथन है तो उसका जानना किसी के वश की बात नहीं रही । पादरी साहब यह बात अपने पहले इस
चन के विरुद्ध बोले हैं कि ईश्वर देह धारण करता है (या नहीं ?) । कर सकता है या नहीं, ऐसा नहीं (था), परन्तु देह धारण

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Thomas

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